लगभग 12 मिनट चोदने के बाद जब वो झड़ने वाला था तो उसने धक्कों को थोड़ा और तेज़ करते हुए कहा- सॉरी मैडम! मुझे बाहर गिराने की आदत तो है नहीं! इसलिए आपके अंदर ही गिरा रहा हूँ। मैं कह भी क्या सकती थी! इसलिए धीरे से हां में सिर को हिलाकर सिर नीचे कर लिया। देखते ही देखते टीचर ने मेरे अंदर धार छोड़ना शुरु कर दिया और लगभग एक मिनट तक उसने अपना माल मेरी झांट वाली चुत में छोड़ता रहा। उसका सारा माल मेरे अंदर गिरने के बाद उसने एक हल्की सी आहहह भरी और मेरी चूचियों पर सिर रख दिया और अपने हाथ से अबकी बार प्यार से हाथ फेरने लगा। हम दोनों ऐसे ही एक मिनट तक पड़े रहे। फिर वो अलग हुए तो मैंने देखा कि मेरी काली झांटों के बीच से एक सफेद धार बह रही है। मैं उसे अपने हाथ से छूने ही जा रही थी कि तभी मास्टर एक कपड़ा ले आए और मेरे हाथ को अलग करके मेरी चूत पर कपड़ा लगाकर उसे पौंछने लगे। तभी उन्होंने मेरी ओर देखा. तो मैं उन्हें देख मुस्कुरा दी. उन्होंने भी मुस्कुरा कर अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर मेरी एक चूची दबा दी। फिर उठकर टीचर ने कहा- अब आप निश्चिंत रहे। आपका काम हो जाएगा। दो दिन बाद प्रिंसिपल साहब आ रहे हैं। मैं उनसे कहक...
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